‘कामयाबी’ जैसा की कहानी का नाम कहता है, हमें हमारी ज़िंदगी में कामयाबी के सही अर्थ बताती है| आरोही की कहानी जहाँ उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, पढ़ाई, नौकरी, शादी की बात बताती है उसे हम सबने कभी न कभी अपनी ज़िंदगी में ज़रूर महसूस किया होगा| पर क्या इन्ही पैमानों से कामयाबी मापी जाती है, सुनिए और जानिये हमारे साथ तृप्ति वर्मा की लिखी ‘कामयाबी’ में |