सुनिए अर्नेस्ट हेमिंग्वे (Ernest Hemingway) द्वारा लिखी प्रसिद्ध कहानी हिल्स लाइक वाइट एलीफैंट (Hills Like White Elephant) का पहली बार हिंदी में अनुवाद हमारे मेहमान लक्ष्य दत्ता के द्वारा, उन्ही की आवाज़ में |
सुनिए अर्नेस्ट हेमिंग्वे (Ernest Hemingway) द्वारा लिखी प्रसिद्ध कहानी हिल्स लाइक वाइट एलीफैंट (Hills Like White Elephant) का पहली बार हिंदी में अनुवाद हमारे मेहमान लक्ष्य दत्ता के द्वारा, उन्ही की आवाज़ में |
घीसू और माधव जो कोई भी काम करने से घबराते हैं, उन्होंने गरीबी को अपने जीवन की सच्चाई मान लिया है जिसके लिये वो कुछ नहीं करना चाहते| पर क्या यह सच्चाई इन दोनों पर इतनी हावी हो जाती है की माधव को अपनी पत्नी का प्रसव पीड़ा में मरना नहीं दिखता | और जब वो मर जाती है तो क्या उसके लिये एक कफ़न का इंतज़ाम करना भी उन्हें भारी लगता है | सुनिए मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) जी द्वारा लिखी कफ़न (Kafan) समाज की एक कड़वी सच्चाई का आईना दिखाती कहानी |
किसी को ज़रूरत में जान कर उसकी मदद करना क्या हमेशा सही होता हैं ? क्या इंसानियत ज़िंदा रहती है या फिर एक बार फिर हार जाती है किसी ऐसे के आगे जिसने उसका गलत फायदा उठाया हो | क्या अपना ही दूसरों पर किया विश्वास डगमगाने लगता है , नार्मन ऐसे ही जवाब ढूंढ़ता है खुद में , ‘डस्क’ साकी द्वारा लिखी इस रचना में | सुनिए और जानिये क्या आपको इंसानियत से जुड़े सवालों के जवाब मिलते हैं या फिर एक प्रश्न रह जाते हैं |
सुदर्शन जी द्वारा लिखी साइकिल की सवारी एक खूबसूरत रचना है जो आपको ले जायेगी ऐसी दुनिया में जहां हमारे लेखक सीख रहे हैं साइकिल चलाना |अब क्या वो साइकिल चलाना सीख पाएंगे ? या फिर साइकिल की सवारी पड़ जायेगी उन पर भारी? सुनिए और याद कीजिये वो किस्सा जब आपने साइकिल चलाना सीखा हो| 🙂
जानिये लघु कथाओं को पढ़ने और समझने का एक अलग ही नज़रिया| सुनिए हमारे मेहमान संदीप शिखर जी के साथ सआदत हसन मंटो जी द्वारा लिखी लघु कथाएं ‘उलाहना’ और ‘जूता’ व स्वयं संदीप शिखर जी द्वारा लिखी ‘असमर्थ’| ये वह लघु कथाएं जो चंद शब्दों में बहुत गहरे अर्थ समझा देती हैं |
कितनी ज़मीन चाहिए इंसान को ज़िंदगी गुज़ारने के लिये , एक महल या 2 गज़ ज़मीन| यह एक बहुत अहम सवाल है हम सबका अपने आप से, जिसका जवाब खूबसूरती से बयान किया है लियो टॉलस्टॉय जी ने अपनी कहानी “कितनी ज़मीन” में, जो कहानी हम सभी को ज़िंदगी की बहुत बड़ी सच्चाई से वाक़िफ़ करवाती है|
दिशाएं हैं चार , पर क्या उन्ही में से एक दिशा में चलना ही सही है , अगर कोई अपनी अलग दिशा बनाना चाहे तो क्या वह वो गलत है| ऐसे कई सवालों के जवाब देती है सुशांत सुप्रिय जी द्वारा लिखी “पांचवी दिशा“| जहाँ एक दिशा तो थी पर चुनी हुई नहीं, अपने मनोरथ से बनायीं एक नयी दिशा|
रंगों के बहुत अलग अलग मायने होते हैं कोई रंग ख़ुशी का होता है तो कोई उदासी का, पर क्या आपने किसी को अपनी ज़िंदगी के हर हालात को रंगों से बयान होते देखा है? सुनिए अभिनव यादव जी द्वारा लिखी खूबसूरत रचना ‘नीले चकत्ते’ और जानिये पंजाबन की कहानी जिसने अपनी ज़िंदगी,अपने हालातों को रंगों के साथ बदलते देखा है|
डॉ सुषमा गुप्ता जी द्वारा लिखी गयी ‘अछूत लड़की’ हमें समाज का ऐसा आईना दिखती है जिससे दुर्भाग्यवश हमने अपने रोज़ की ख़बरों का हिस्सा मान किया है | चाहे वो जात पात हो या किसी लड़की से बलात्कार की खबर। पर क्या होता है जब आप असल में किसी ऐसी इंसान से मिलते है जिसने उन कड़वी सच्चाइयों को जिया है और जो अपने हालातों से डरने बजाय उनसे लड़ रहा है| जानिये ऐसी ही एक लड़की अनामिका की कहानी|