कैसे तलाशेगा एक परदेसी अपने आप को अनजानी धरती पर अनजाने लोगों के बीच जानिये ममता कालिया जी की लिखी ‘परदेसी’ में |
कैसे तलाशेगा एक परदेसी अपने आप को अनजानी धरती पर अनजाने लोगों के बीच जानिये ममता कालिया जी की लिखी ‘परदेसी’ में |
इंसान हो या जानवर उनके सांझे ज़ज़्बातों को समझाती चित्रा मुद्गल जी की खूबसूरत कहानी ‘जंगल’ |
इस ओणम सुनिए अमिताभ शंकर राय चौधरी जी की लिखी आदाब , कहानी जो समर्पित है चथुन्नी जी को जिन्होंने अपनी उम्र के 6 दशक पुलिकाली में बाघ का किरदार निभाया |
ज़िन्दगी की उलझाती परिस्थितियों में क्या एक निवाला निगला जाएगा या थूक दिया जाएगा , सुनिए इस्मत चुगताई जी द्वारा लिखी ‘निवाला’ में |
इस रक्षाबंधन सुनिए शिवानी जी कि लिखी मार्मिक कहानी ‘मेरा भाई’ |
सुनिए भगवती चरण जी की लिखी गुदगुदाने वाली रचना , वरना हम भी आदमी थे काम के |
कैसी होगी विदेश की धरती पर अपने वजूद की तलाश , सुनिए डॉ वंदना मुकेश जी की लिखी “सरोज रानियां” में |
क्या कभी किसी के दिल की धड़कने सुन आपकी धड़कनें रुक गयी , सुनिए एडगर एलान पो की लिखी थ्रिलर रचना ‘ दिल की आवाज़’ में |
कुछ अनजान रिश्ते जोड़ेगी या अपनों से मुलाक़ात करवाएंगी ये वेणियाँ , सुनिए सुखबीर जी की लिखी वेणियाँ में |
क्या बताएँगे दादा जी वक़्त या उसकी कीमत , सुनिए रोहन कानूनगो की लिखी बेहतरीन रचना ‘घड़ी वाले दादा’ में |